| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा » श्लोक 13 |
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| | | | श्लोक 3.11.13  | तस्मिन् क्षणेऽथ प्रववौ मारुतो भृशदारुण:।
रजसा संवृतं तेन नष्टज्योतिरभून्नभ:॥ १३॥ | | | | | | अनुवाद | | उसी समय बड़ी प्रचण्ड वायु चलने लगी, मानो आकाश के तारे भी उसकी उड़ाई हुई धूल से ढककर अस्त हो गए हों॥13॥ | | | | At this very moment a very strong wind began to blow. It seemed as if the stars in the sky had also set, covered by the dust it stirred up.॥ 13॥ | | ✨ ai-generated | | |
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