Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.109.9-10h: उस समय उसके जल में बड़े-बड़े भँवर और लहरें उठ रही थीं। वह मछलियों और मगरमच्छों से भरा हुआ था। हे राजन! भगवान शिव ने आकाश में स्थित मेखला के रूप में गंगा को अपने मस्तक पर मोतियों की माला के समान धारण किया था। | mahabharat अध्याय 3.109: पृथ्वीपर गंगाजीके उतरने और समुद्रको जलसे भरनेका विवरण तथा सगरपुत्रोंका उद्धार । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय उसके जल में बड़े-बड़े भँवर और लहरें उठ रही थीं। वह मछलियों और मगरमच्छों से भरा हुआ था। हे राजन! भगवान शिव ने आकाश में स्थित मेखला के रूप में गंगा को अपने मस्तक पर मोतियों की माला के समान धारण किया था।
At that time, huge whirlpools and waves were rising in its water. It was full of fishes and crocodiles. O King! Lord Shiva wore the Ganga in the form of a belt of the sky like a necklace of pearls on his forehead. 9 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥