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mahabharat 3.109.16-18: जगत्प्रशंसित भगवान शंकर ने गंगाजी को अपने सिर पर धारण किया और देवताओं के साथ श्रेष्ठ पर्वत कैलाश पर गए। राजा भगीरथ ने गंगाजी को लेकर समुद्र के तट पर जाकर बड़े वेग से वरुणालय समुद्र को भर दिया और गंगाजी को अपनी पुत्री बना लिया। 16-18॥   |   mahabharat अध्याय 3.109: पृथ्वीपर गंगाजीके उतरने और समुद्रको जलसे भरनेका विवरण तथा सगरपुत्रोंका उद्धार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 109: पृथ्वीपर गंगाजीके उतरने और समुद्रको जलसे भरनेका विवरण तथा सगरपुत्रोंका उद्धार  »  श्लोक 16-18
 
 
श्लोक  3.109.16-18 
गङ्गाया धारणं कृत्वा हरो लोकनमस्कृत:॥ १६॥
कैलासं पर्वतश्रेष्ठं जगाम त्रिदशै: सह।
समासाद्य समुद्रं च गङ्गया सहितो नृप:॥ १७॥
पूरयामास वेगेन समुद्रं वरुणालयम्।
दुहितृत्वे च नृपतिर्गङ्गां समनुकल्पयत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जगत्प्रशंसित भगवान शंकर ने गंगाजी को अपने सिर पर धारण किया और देवताओं के साथ श्रेष्ठ पर्वत कैलाश पर गए। राजा भगीरथ ने गंगाजी को लेकर समुद्र के तट पर जाकर बड़े वेग से वरुणालय समुद्र को भर दिया और गंगाजी को अपनी पुत्री बना लिया। 16-18॥
 
World-vaunted Lord Shankar took Gangaji on his head and went to Kailash, the best mountain, along with the gods. King Bhagiratha went to the seashore with Gangaji, filled the Varunalaya sea with great speed and made Gangaji his daughter. 16-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)