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mahabharat 3.108.27: नरेश्वर! तत्पश्चात् गंगाजी की प्रेरणा से श्रेष्ठ पुरुष भगीरथ ने अपने पूर्वजों को स्वर्ग प्राप्ति कराने के उद्देश्य से महादेवजी से गंगाजी का वेग धारण करने की प्रार्थना की॥27॥   |   mahabharat अध्याय 3.108: भगीरथका हिमालयपर तपस्याद्वारा गंगा और महादेवजीको प्रसन्न करके उनसे वर प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 108: भगीरथका हिमालयपर तपस्याद्वारा गंगा और महादेवजीको प्रसन्न करके उनसे वर प्राप्त करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.108.27 
अगृह्णाच्च वरं तस्माद् गङ्गाया धारणे नृप।
स्वर्गे वासं समुद्दिश्य पितॄणां स नरोत्तम:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! तत्पश्चात् गंगाजी की प्रेरणा से श्रेष्ठ पुरुष भगीरथ ने अपने पूर्वजों को स्वर्ग प्राप्ति कराने के उद्देश्य से महादेवजी से गंगाजी का वेग धारण करने की प्रार्थना की॥27॥
 
Nareshwar! Thereafter, as per the inspiration of Gangaji, Bhagiratha, the best human being, requested Mahadevji to take the speed of Gangaji for the purpose of making his ancestors attain heaven. 27॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायामगस्त्योपाख्याने अष्टाधिकशततमोऽध्याय:॥ १०८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें अगस्त्योपाख्यानविषयक एक सौ आठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०८॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल २८ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)