श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 108: भगीरथका हिमालयपर तपस्याद्वारा गंगा और महादेवजीको प्रसन्न करके उनसे वर प्राप्त करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.108.23 
न शक्तस्त्रिषु लोकेषु कश्चिद् धारयितुं नृप।
अन्यत्र विबुधश्रेष्ठान्नीलकण्ठान्महेश्वरात्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'राजन्! देवताओं में श्रेष्ठ महेश्वर नीलकण्ठ के अतिरिक्त तीनों लोकों में कोई भी मेरा वेग सहन नहीं कर सकता।'
 
'King! Except the greatest of gods, Maheshwar Neelkanth, no one in the three worlds can bear my speed. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)