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mahabharat 3.108.21: लोमश जी कहते हैं - हे राजन! राजा भगीरथ के ये वचन सुनकर जगत्पूज्य गंगाजी अत्यन्त प्रसन्न हुईं और उनसे इस प्रकार बोलीं -॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 3.108: भगीरथका हिमालयपर तपस्याद्वारा गंगा और महादेवजीको प्रसन्न करके उनसे वर प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.108.21 
लोमश उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो राज्ञो गङ्गा लोकनमस्कृता।
भगीरथमिदं वाक्यं सुप्रीता समभाषत॥ २१॥
 
 
अनुवाद
लोमश जी कहते हैं - हे राजन! राजा भगीरथ के ये वचन सुनकर जगत्पूज्य गंगाजी अत्यन्त प्रसन्न हुईं और उनसे इस प्रकार बोलीं -॥ 21॥
 
Lomasha ji says - O King! On hearing these words of King Bhagiratha, the world-revered Ganga became very happy and spoke to him thus -॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)