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श्लोक 3.108.21  |
लोमश उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो राज्ञो गङ्गा लोकनमस्कृता।
भगीरथमिदं वाक्यं सुप्रीता समभाषत॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| लोमश जी कहते हैं - हे राजन! राजा भगीरथ के ये वचन सुनकर जगत्पूज्य गंगाजी अत्यन्त प्रसन्न हुईं और उनसे इस प्रकार बोलीं -॥ 21॥ |
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| Lomasha ji says - O King! On hearing these words of King Bhagiratha, the world-revered Ganga became very happy and spoke to him thus -॥ 21॥ |
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