vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 108: भगीरथका हिमालयपर तपस्याद्वारा गंगा और महादेवजीको प्रसन्न करके उनसे वर प्राप्त करना
»
श्लोक 15
श्लोक
3.108.15
गङ्गोवाच
किमिच्छसि महाराज मत्त: किं च ददानि ते।
तद् ब्रवीहि नरश्रेष्ठ करिष्यामि वचस्तव॥ १५॥
अनुवाद
गंगाजी बोलीं - महाराज! आप मुझसे क्या चाहते हैं, मैं आपको क्या दूँ? हे पुरुषश्रेष्ठ! मुझे बताइए, मैं आपकी प्रार्थना पूरी करूँगी।
Gangaji said - Maharaj! What do you want from me, what should I give you? O best of men! Tell me, I will fulfill your request. 15.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×