श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 107: सगरके पुत्रोंकी उत्पत्ति, साठ हजार सगरपुत्रोंका कपिलकी क्रोधाग्निसे भस्म होना, असमञ्जसका परित्याग, अंशुमान‍्के प्रयत्नसे सगरके यज्ञकी पूर्ति, अंशुमान‍्से दिलीपको और दिलीपसे भगीरथको राज्यकी प्राप्ति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.107.6 
त्रिदशांश्चाप्यबाधन्त तथा गन्धर्वराक्षसान्।
सर्वाणि चैव भूतानि शूरा: समरशालिन:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वे वीर राजकुमार, जो युद्धस्थल में शोभायमान थे, देवताओं, गन्धर्वों, राक्षसों तथा समस्त प्राणियों को कष्ट देते थे ॥6॥
 
Those valiant princes, who looked glorious on the battlefield, used to trouble the gods, Gandharvas, demons and all living creatures. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)