vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 107: सगरके पुत्रोंकी उत्पत्ति, साठ हजार सगरपुत्रोंका कपिलकी क्रोधाग्निसे भस्म होना, असमञ्जसका परित्याग, अंशुमान्के प्रयत्नसे सगरके यज्ञकी पूर्ति, अंशुमान्से दिलीपको और दिलीपसे भगीरथको राज्यकी प्राप्ति
»
श्लोक 26
श्लोक
3.107.26
छिन्नशीर्षा विदेहाश्च भिन्नत्वगस्थिसंधय:।
प्राणिन: समदृश्यन्त शतशोऽथ सहस्रश:॥ २६॥
अनुवाद
सैकड़ों-हजारों प्राणी दिखाई दे रहे थे जिनके सिर कटे हुए थे, शरीर फटे हुए थे, चमड़ा उधेड़ा हुआ था और हड्डियाँ टूटी हुई थीं॥ 26॥
Hundreds and thousands of creatures were seen whose heads were cut off, bodies were torn apart, skin was peeled off and bones were broken.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×