श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 107: सगरके पुत्रोंकी उत्पत्ति, साठ हजार सगरपुत्रोंका कपिलकी क्रोधाग्निसे भस्म होना, असमञ्जसका परित्याग, अंशुमान‍्के प्रयत्नसे सगरके यज्ञकी पूर्ति, अंशुमान‍्से दिलीपको और दिलीपसे भगीरथको राज्यकी प्राप्ति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.107.2 
एकैकशस्तत: कृत्वा बीजं बीजं नराधिप:।
घृतपूर्णेषु कुम्भेषु तान् भागान् विदधे तत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजा ने प्रत्येक बीज को अलग किया और उन्हें घी से भरे बर्तनों में रख दिया।
 
The king separated each seed and placed them in pots filled with ghee.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)