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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 106: राजा सगरका संतानके लिये तपस्या करना और शिवजीके द्वारा वरदान पाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.106.6 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्तस्तु विप्रेन्द्रो धर्मराज्ञा महात्मना।
कथयामास माहात्म्यं सगरस्य महात्मन:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - 'जनमेजय! महात्मा धर्मराज के इस प्रकार पूछने पर महाबली ब्राह्मण लोमश ने महाबली राजा सगर का माहात्म्य सुनाया।
 
Vaishmpayana says - 'Janamejaya! On being asked in this manner by Mahatma Dharmaraj, the great Brahmin Lomasha narrated the greatness of the great King Sagar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)