Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.106.5: हे तपस्वी! हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं आपसे राजाओं के उत्तम चरित्र का वर्णन करने वाला यह प्रसंग विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 3.106: राजा सगरका संतानके लिये तपस्या करना और शिवजीके द्वारा वरदान पाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 106: राजा सगरका संतानके लिये तपस्या करना और शिवजीके द्वारा वरदान पाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.106.5 
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं विस्तरेण तपोधन।
कथ्यमानं त्वया विप्र राज्ञां चरितमुत्तमम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे तपस्वी! हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं आपसे राजाओं के उत्तम चरित्र का वर्णन करने वाला यह प्रसंग विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ॥5॥
 
O ascetic! O great Brahmin! I wish to hear in detail from you this episode, which describes the excellent character of kings. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)