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mahabharat 3.106.23: ‘पृथ्वीपति! ऐसा करने से तुम्हें साठ हजार पुत्र प्राप्त होंगे। नरश्रेष्ठ! महादेवजी ने तुम्हें इसी क्रम से पुत्र उत्पन्न करने का निर्देश दिया है; अतः तुम्हें अन्य कोई विचार नहीं करना चाहिए। 23॥   |   mahabharat अध्याय 3.106: राजा सगरका संतानके लिये तपस्या करना और शिवजीके द्वारा वरदान पाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 106: राजा सगरका संतानके लिये तपस्या करना और शिवजीके द्वारा वरदान पाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.106.23 
तत: पुत्रसहस्राणि षष्टिं प्राप्स्यसि पार्थिव।
महादेवेन दिष्टं ते पुत्रजन्म नराधिप।
अनेन क्रमयोगेन मा ते बुद्धिरतोऽन्यथा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
‘पृथ्वीपति! ऐसा करने से तुम्हें साठ हजार पुत्र प्राप्त होंगे। नरश्रेष्ठ! महादेवजी ने तुम्हें इसी क्रम से पुत्र उत्पन्न करने का निर्देश दिया है; अतः तुम्हें अन्य कोई विचार नहीं करना चाहिए। 23॥
 
‘Prithvipati! By doing this you will get sixty thousand sons. Male best! Mahadevji has instructed you to have a son in this order; Therefore, you should not have any other thoughts. 23॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां सगरसंततिकथने षडधिकशततमोऽध्याय:॥ १०६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसङ्गमें सगरसंततिवर्णनविषयक एक सौ छठाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)