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mahabharat 3.106.17-20: ऐसा कहकर भगवान शंकर वहाँ अन्तर्धान हो गए। राजा सगर भी अत्यन्त प्रसन्न हुए और अपनी पत्नियों सहित अपने निवासस्थान को चले गए। हे पुरुषश्रेष्ठ! तदनन्तर उनकी कमल के समान दो पत्नियाँ वैदर्भि और शैब्या गर्भवती हुईं। फिर समय आने पर वैदर्भि ने अपने गर्भ से एक तूंबी को जन्म दिया और शैब्या ने भगवान के समान सुन्दर रूप वाले एक पुत्र को जन्म दिया। राजा सगर ने उस तूंबी को फेंक देने का विचार किया। 17-20॥   |   mahabharat अध्याय 3.106: राजा सगरका संतानके लिये तपस्या करना और शिवजीके द्वारा वरदान पाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 106: राजा सगरका संतानके लिये तपस्या करना और शिवजीके द्वारा वरदान पाना  »  श्लोक 17-20
 
 
श्लोक  3.106.17-20 
एवमुक्त्वा तु तं रुद्रस्तत्रैवान्तरधीयत।
स चापि सगरो राजा जगाम स्वं निवेशनम्॥ १७॥
पत्नीभ्यां सहितस्तत्र सोऽतिहृष्टमनास्तदा।
तस्य ते मनुजश्रेष्ठ भार्ये कमललोचने॥ १८॥
वैदर्भी चैव शैब्या च गर्भिण्यौ सम्बभूवतु:।
तत: कालेन वैदर्भी गर्भालाबुं व्यजायत॥ १९॥
शैब्या च सुषुवे पुत्रं कुमारं देवरूपिणम्।
तदालाबुं समुत्स्रष्टुं मनश्चक्रे स पार्थिव:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर भगवान शंकर वहाँ अन्तर्धान हो गए। राजा सगर भी अत्यन्त प्रसन्न हुए और अपनी पत्नियों सहित अपने निवासस्थान को चले गए। हे पुरुषश्रेष्ठ! तदनन्तर उनकी कमल के समान दो पत्नियाँ वैदर्भि और शैब्या गर्भवती हुईं। फिर समय आने पर वैदर्भि ने अपने गर्भ से एक तूंबी को जन्म दिया और शैब्या ने भगवान के समान सुन्दर रूप वाले एक पुत्र को जन्म दिया। राजा सगर ने उस तूंबी को फेंक देने का विचार किया। 17-20॥
 
Saying this, Lord Shankar disappeared there. King Sagar also became very happy and went to his residence along with his wives. Male best! Subsequently, his two lotus-like wives Vaidarbhi and Shaibya became pregnant. Then when the time came, Vaidarbhini gave birth to a Tumbi from her womb and Shaibya gave birth to a son with a beautiful appearance like that of God. King Sagar thought of throwing away that tumbler. 17-20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)