Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.106.10-12: राजेन्द्र! राजा सगर अपनी दोनों पत्नियों के साथ कैलाश पर्वत पर जाकर पुत्र की इच्छा के अनुसार घोर तप करने लगे। योगयुक्त होकर घोर तप में तत्पर महाराज सगर ने त्रिपुरनाशक, त्रिनेत्रधारी, शंकर, भव, ईशान, शूलपाणि, पिनाकी, त्र्यम्बक, उग्रेश, बहुरूप और उमापति आदि नामों से प्रसिद्ध भगवान शिव के दर्शन किए॥10-12॥ | mahabharat अध्याय 3.106: राजा सगरका संतानके लिये तपस्या करना और शिवजीके द्वारा वरदान पाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजेन्द्र! राजा सगर अपनी दोनों पत्नियों के साथ कैलाश पर्वत पर जाकर पुत्र की इच्छा के अनुसार घोर तप करने लगे। योगयुक्त होकर घोर तप में तत्पर महाराज सगर ने त्रिपुरनाशक, त्रिनेत्रधारी, शंकर, भव, ईशान, शूलपाणि, पिनाकी, त्र्यम्बक, उग्रेश, बहुरूप और उमापति आदि नामों से प्रसिद्ध भगवान शिव के दर्शन किए॥10-12॥
Rajendra! King Sagar along with his two wives went to Mount Kailash and started performing severe penance as per the wish of his son. Maharaj Sagar, who was engaged in great penance after becoming yogic, saw Lord Shiva, famous by the names of Tripuranashak, Trinetradhari, Shankar, Bhava, Ishaan, Shulpani, Pinaki, Trimbak, Ugresh, Bahurup and Umapati etc. 10-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥