Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.105.d2h-20: समुद्र को भरने के उद्देश्य से बार-बार आपस में परामर्श करके भगवान विष्णु सहित सभी देवता हाथ जोड़कर ब्रह्माजी के पास गए और उनसे पूछा, ‘समुद्र को पुनः भरने के लिए क्या करना चाहिए?’॥20॥ | mahabharat अध्याय 3.105: अगस्त्यजीके द्वारा समुद्रपान और देवताओंका कालेय दैत्योंका वध करके ब्रह्माजीसे समुद्रको पुन: भरनेका उपाय पूछना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
समुद्र को भरने के उद्देश्य से बार-बार आपस में परामर्श करके भगवान विष्णु सहित सभी देवता हाथ जोड़कर ब्रह्माजी के पास गए और उनसे पूछा, ‘समुद्र को पुनः भरने के लिए क्या करना चाहिए?’॥20॥
After consulting amongst themselves again and again with the objective of filling the ocean, all the gods including Lord Vishnu went to Lord Brahma with folded hands and asked him, 'What should be done to fill the ocean again?'॥ 20॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायामगस्त्योपाख्याने पञ्चाधिकशततमोऽध्याय:॥ १०५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें अगस्त्योपाख्यानविषयक एक सौ पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०५॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल २१ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥