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mahabharat 3.105.8: जब महान्, बलवान, वेगवान और अत्यन्त बुद्धिमान देवतागण सिंहों के समान गर्जना करके दैत्यों का संहार करने लगे, तब वे उन तेजवान और महान् देवताओं का वेग सहन न कर सके॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.105: अगस्त्यजीके द्वारा समुद्रपान और देवताओंका कालेय दैत्योंका वध करके ब्रह्माजीसे समुद्रको पुन: भरनेका उपाय पूछना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 105: अगस्त्यजीके द्वारा समुद्रपान और देवताओंका कालेय दैत्योंका वध करके ब्रह्माजीसे समुद्रको पुन: भरनेका उपाय पूछना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.105.8 
ते वध्यमानास्त्रिदशैर्महात्मभि-
र्महाबलैर्वेगिभिरुन्नदद्भि:।
न सेहिरे वेगवतां महात्मनां
वेगं तदा धारयितुं दिवौकसाम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जब महान्, बलवान, वेगवान और अत्यन्त बुद्धिमान देवतागण सिंहों के समान गर्जना करके दैत्यों का संहार करने लगे, तब वे उन तेजवान और महान् देवताओं का वेग सहन न कर सके॥8॥
 
When the great, powerful, swift and very intelligent gods started killing the demons by roaring like lions, they could not bear the speed of those fast and great gods. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)