Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.105.5: 'लोकभवन महर्षे! आप हमारे रक्षक और समस्त लोकों के रचयिता हैं। आपकी कृपा से देवताओं सहित समस्त लोक नष्ट नहीं होगा।' | mahabharat अध्याय 3.105: अगस्त्यजीके द्वारा समुद्रपान और देवताओंका कालेय दैत्योंका वध करके ब्रह्माजीसे समुद्रको पुन: भरनेका उपाय पूछना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वं नस्त्राता विधाता च लोकानां लोकभावन।
त्वत्प्रसादात् समुच्छेदं न गच्छेत् सामरं जगत्॥ ५॥
अनुवाद
'लोकभवन महर्षे! आप हमारे रक्षक और समस्त लोकों के रचयिता हैं। आपकी कृपा से देवताओं सहित समस्त लोक नष्ट नहीं होगा।'
‘Lokbhavan Maharshe! You are our protector and the creator of all the worlds. By your grace the entire world including the gods will not be destroyed. 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥