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mahabharat 3.105.4: उसे समुद्र पीते देखकर इन्द्रसहित सभी देवता आश्चर्यचकित हो गए और उसकी स्तुति करके उसका आदर करने लगे॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.105: अगस्त्यजीके द्वारा समुद्रपान और देवताओंका कालेय दैत्योंका वध करके ब्रह्माजीसे समुद्रको पुन: भरनेका उपाय पूछना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 105: अगस्त्यजीके द्वारा समुद्रपान और देवताओंका कालेय दैत्योंका वध करके ब्रह्माजीसे समुद्रको पुन: भरनेका उपाय पूछना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.105.4 
पीयमानं समुद्रं तं दृष्ट्वा सेन्द्रास्तदामरा:।
विस्मयं परमं जग्मु: स्तुतिभिश्चाप्यपूजयन्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उसे समुद्र पीते देखकर इन्द्रसहित सभी देवता आश्चर्यचकित हो गए और उसकी स्तुति करके उसका आदर करने लगे॥4॥
 
Seeing him drinking the ocean, all the gods including Indra were astonished and began honoring him with praises. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)