श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 105: अगस्त्यजीके द्वारा समुद्रपान और देवताओंका कालेय दैत्योंका वध करके ब्रह्माजीसे समुद्रको पुन: भरनेका उपाय पूछना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.105.13 
निहतान् दानवान् दृष्ट्वा त्रिदशा मुनिपुङ्गवम्।
तुष्टुवुर्विविधैर्वाक्यैरिदं वचनमब्रुवन्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
समस्त राक्षसों को मारा हुआ देखकर देवताओं ने अगस्त्य मुनि की अनेक प्रकार से स्तुति की और निम्न प्रकार कहा -॥13॥
 
Seeing all the demons killed, the gods praised the sage Agastya in various ways and said the following -॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)