श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 105: अगस्त्यजीके द्वारा समुद्रपान और देवताओंका कालेय दैत्योंका वध करके ब्रह्माजीसे समुद्रको पुन: भरनेका उपाय पूछना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.105.12 
हतशेषास्तत: केचित् कालेया मनुजोत्तम।
विदार्य वसुधां देवीं पातालतलमास्थिता:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! जो कालेय राक्षस मरकर भी जीवित बचे थे, उनमें से कुछ वसुन्धरा देवी को चीरकर पाताल लोक में चले गए॥12॥
 
O best of men! Some of the Kaaleya demons who survived death went to the netherworld after ripping apart Vasundhara Devi.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)