Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.104.9-10: देवताओं ने कहा- हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! यह पर्वतराज विन्ध्य क्रोध के वशीभूत होकर सूर्य, चन्द्रमा और नक्षत्रों की गति में बाधा डाल रहा है। हे महामुने! आपके अतिरिक्त इसे कोई नहीं रोक सकता। अतः आप जाकर इसे रोकिए।॥9-10॥ | mahabharat अध्याय 3.104: अगस्त्यजीका विन्ध्यपर्वतको बढ़नेसे रोकना और देवताओंके साथ सागर-तटपर जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवताओं ने कहा- हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! यह पर्वतराज विन्ध्य क्रोध के वशीभूत होकर सूर्य, चन्द्रमा और नक्षत्रों की गति में बाधा डाल रहा है। हे महामुने! आपके अतिरिक्त इसे कोई नहीं रोक सकता। अतः आप जाकर इसे रोकिए।॥9-10॥
The gods said— O great Brahmin! This mountain king Vindhya, under the influence of anger, is obstructing the path of the Sun and the Moon and the movement of the stars. O great one! No one else can stop this except you. Therefore, you go and stop him.॥ 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥