Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.104.7: यह देखकर सभी देवतागण मिलकर महान पर्वतराज विन्ध्य के पास गए और अनेक प्रकार से उनके क्रोध को शांत करने का प्रयत्न किया; परन्तु उन्होंने उनकी एक न सुनी। | mahabharat अध्याय 3.104: अगस्त्यजीका विन्ध्यपर्वतको बढ़नेसे रोकना और देवताओंके साथ सागर-तटपर जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो देवा: सहिता: सर्व एव
विन्ध्यं समागम्य महाद्रिराजम्।
निवारयामासुरुपायतस्तं
न च स्म तेषां वचनं चकार॥ ७॥
अनुवाद
यह देखकर सभी देवतागण मिलकर महान पर्वतराज विन्ध्य के पास गए और अनेक प्रकार से उनके क्रोध को शांत करने का प्रयत्न किया; परन्तु उन्होंने उनकी एक न सुनी।
Seeing this, all the gods together went to the great mountain king Vindhya and tried to calm his anger by various means; but he did not listen to them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥