Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.104.14: शत्रुसूदन! विन्ध्य के साथ ऐसा समझौता करके मित्रावरुणनन्दन अगस्त्यजी चले गए और आज तक दक्षिण प्रदेश से नहीं लौटे हैं॥14॥ | mahabharat अध्याय 3.104: अगस्त्यजीका विन्ध्यपर्वतको बढ़नेसे रोकना और देवताओंके साथ सागर-तटपर जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं स समयं कृत्वा विन्ध्येनामित्रकर्शन।
अद्यापि दक्षिणाद्देशाद् वारुणिर्न निवर्तते॥ १४॥
अनुवाद
शत्रुसूदन! विन्ध्य के साथ ऐसा समझौता करके मित्रावरुणनन्दन अगस्त्यजी चले गए और आज तक दक्षिण प्रदेश से नहीं लौटे हैं॥14॥
Shatrusudan! Having made such an arrangement with Vindhya, Mitravarunnandan Agastyaji went away and has not returned from the southern state till date. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥