Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.104.13: 'जब तक मैं लौट न आऊँ, तब तक मेरी प्रतीक्षा करते रहो। शैलराज! मेरे लौटने के बाद तुम अपनी इच्छानुसार प्रगति करते रहना।'॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.104: अगस्त्यजीका विन्ध्यपर्वतको बढ़नेसे रोकना और देवताओंके साथ सागर-तटपर जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 104: अगस्त्यजीका विन्ध्यपर्वतको बढ़नेसे रोकना और देवताओंके साथ सागर-तटपर जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.104.13 
यावदागमनं मह्यं तावत् त्वं प्रतिपालय।
निवृत्ते मयि शैलेन्द्र ततो वर्धस्व कामत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'जब तक मैं लौट न आऊँ, तब तक मेरी प्रतीक्षा करते रहो। शैलराज! मेरे लौटने के बाद तुम अपनी इच्छानुसार प्रगति करते रहना।'॥13॥
 
‘Keep waiting for me till I return. Shailraj! After I return you can keep progressing as per your wish.'॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)