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mahabharat 3.104.11: देवताओं के ये वचन सुनकर महाबली ब्राह्मण अगस्त्य अपनी पत्नी लोपामुद्रा के साथ विन्ध्य पर्वत पर गए और वहाँ प्रकट होकर उससे इस प्रकार बोले -॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.104: अगस्त्यजीका विन्ध्यपर्वतको बढ़नेसे रोकना और देवताओंके साथ सागर-तटपर जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 104: अगस्त्यजीका विन्ध्यपर्वतको बढ़नेसे रोकना और देवताओंके साथ सागर-तटपर जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.104.11 
तच्छ्रुत्वा वचनं विप्र: सुराणां शैलमभ्यगात्।
सोऽभिगम्याब्रवीद् विन्ध्यं सदार: समुपस्थित:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
देवताओं के ये वचन सुनकर महाबली ब्राह्मण अगस्त्य अपनी पत्नी लोपामुद्रा के साथ विन्ध्य पर्वत पर गए और वहाँ प्रकट होकर उससे इस प्रकार बोले -॥11॥
 
On hearing these words of the gods, the great Brahmin Agastya went to the Vindhya mountains with his wife Lopamudra and appeared there and spoke to her as follows -॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)