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mahabharat 3.103.9: वे सर्पों और मगरमच्छों से भरे हुए भयंकर समुद्र में प्रवेश करके रात्रि में सम्पूर्ण जगत् का नाश करने और यहाँ ऋषियों का वध करने के लिए निकलते हैं।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.103: भगवान् विष्णुके आदेशसे देवताओंका महर्षि अगस्त्यके आश्रमपर जाकर उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 103: भगवान् विष्णुके आदेशसे देवताओंका महर्षि अगस्त्यके आश्रमपर जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.103.9 
ते प्रविश्योदधिं घोरं नक्रग्राहसमाकुलम्।
उत्सादनार्थं लोकानां रात्रौ घ्नन्ति ऋषीनिह॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वे सर्पों और मगरमच्छों से भरे हुए भयंकर समुद्र में प्रवेश करके रात्रि में सम्पूर्ण जगत् का नाश करने और यहाँ ऋषियों का वध करने के लिए निकलते हैं।॥9॥
 
Entering the fearsome ocean filled with snakes and crocodiles, they emerge at night to destroy the entire world and kill the sages here.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)