Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.103.16: जब पर्वतों में श्रेष्ठ विन्ध्य पर्वत सूर्यदेव से रुष्ट होकर सहसा ऊपर उठने लगा, तब आपने उसे रोक दिया। आपकी आज्ञा का उल्लंघन न करते हुए विन्ध्यगिरि आज भी ऊपर नहीं उठ रहा है॥16॥ | mahabharat अध्याय 3.103: भगवान् विष्णुके आदेशसे देवताओंका महर्षि अगस्त्यके आश्रमपर जाकर उनकी स्तुति करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्रोधात् प्रवृद्ध: सहसा भास्करस्य नगोत्तम:।
वचस्तवानतिक्रामन् विन्ध्य: शैलो न वर्धते॥ १६॥
अनुवाद
जब पर्वतों में श्रेष्ठ विन्ध्य पर्वत सूर्यदेव से रुष्ट होकर सहसा ऊपर उठने लगा, तब आपने उसे रोक दिया। आपकी आज्ञा का उल्लंघन न करते हुए विन्ध्यगिरि आज भी ऊपर नहीं उठ रहा है॥16॥
When Vindhya, the best among the mountains, got angry with the Sun God and suddenly started rising, you stopped it. Not disobeying your orders, Vindhyagiri is not rising even today.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥