श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 102: कालेयोंद्वारा तपस्वियों, मुनियों और ब्रह्मचारियों आदिका संहार तथा देवताओंद्वारा भगवान् विष्णुकी स्तुति  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.102.26 
तस्मात् त्वां देवदेवेश लोकार्थं ज्ञापयामहे।
रक्ष लोकांश्च देवांश्च शक्रं च महतो भयात्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'देवदेवेश्वर! इसीलिए लोक कल्याण के उद्देश्य से हम आपसे प्रार्थना कर रहे हैं कि आप सम्पूर्ण जगत के समस्त प्राणियों, देवताओं और इन्द्र की महान भय से रक्षा करें॥26॥
 
'Devdeveshwar! That is why, for the purpose of public welfare, we are requesting that you protect all the living beings, gods and Indra of the entire world with great fear. 26॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां विष्णुस्तवे द्वॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १०२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें विष्णुस्तुतिविषयक एक सौ दोवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)