श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 102: कालेयोंद्वारा तपस्वियों, मुनियों और ब्रह्मचारियों आदिका संहार तथा देवताओंद्वारा भगवान् विष्णुकी स्तुति  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.102.25 
एवमादीनि कर्माणि येषां संख्या न विद्यते।
अस्माकं भयभीतानां त्वं गतिर्मधुसूदन॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'तुम्हारे कर्म इतने हैं कि उनकी गणना नहीं की जा सकती। मधुसूदन! हम भयभीत देवताओं के लिए तुम ही एकमात्र आश्रय हो।॥ 25॥
 
‘You have so many deeds that they cannot be counted. Madhusudan! You are the only refuge of us frightened gods.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)