श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 102: कालेयोंद्वारा तपस्वियों, मुनियों और ब्रह्मचारियों आदिका संहार तथा देवताओंद्वारा भगवान् विष्णुकी स्तुति  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.102.24 
असुरश्च महेष्वासो जम्भ इत्यभिविश्रुत:।
यज्ञक्षोभकर: क्रूरस्त्वयैव विनिपातित:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'आपने ही यज्ञों का क्रूर विध्वंस करने वाले प्रसिद्ध जम्भ नामक दैत्य का वध किया था ॥24॥
 
'You yourself had killed the famous demon named Jambh, the cruel destroyer of yagyas. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)