श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 102: कालेयोंद्वारा तपस्वियों, मुनियों और ब्रह्मचारियों आदिका संहार तथा देवताओंद्वारा भगवान् विष्णुकी स्तुति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.102.21 
त्वया भूमि: पुरा नष्टा समुद्रात् पुष्करेक्षण।
वाराहं वपुराश्रित्य जगदर्थे समुद्‍धृता॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'कमल-नयन! पूर्वकाल में आपने वराह अवतार धारण करके सम्पूर्ण जगत के कल्याण के लिए इस लुप्त पृथ्वी को समुद्र के जल से मुक्त किया था।
 
'Lotus-eyed! In the past you had taken the form of Varaah and had redeemed this lost earth from the water of the ocean for the benefit of the entire world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)