श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 102: कालेयोंद्वारा तपस्वियों, मुनियों और ब्रह्मचारियों आदिका संहार तथा देवताओंद्वारा भगवान् विष्णुकी स्तुति  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.102.20 
त्वं न: स्रष्टा च भर्ता च हर्ता च जगत: प्रभो।
त्वया सृष्टमिदं विश्वं यच्चेङ्गं यच्च नेङ्गति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! आप हमारे रचयिता और रक्षक हैं। आप ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के संहारक हैं। आपने ही इस सम्पूर्ण स्थावर और जंगम ब्रह्माण्ड की रचना की है।
 
‘Prabhu! You are our creator and protector. You are the destroyer of the whole universe. You are the one who created this entire universe, both immovable and mobile.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)