vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 102: कालेयोंद्वारा तपस्वियों, मुनियों और ब्रह्मचारियों आदिका संहार तथा देवताओंद्वारा भगवान् विष्णुकी स्तुति
»
श्लोक 16
श्लोक
3.102.16
न चैतानधिजग्मुस्ते समुद्रं समुपाश्रितान्।
श्रमं जग्मुश्च परममाजग्मु: क्षयमेव च॥ १६॥
अनुवाद
परन्तु वे समुद्र में छिपे हुए राक्षसों को पकड़ न सके। उन्होंने बहुत परिश्रम किया और अन्त में थककर घर लौट आए॥16॥
But they could not catch the demons hiding in the sea. They worked very hard and finally, exhausted, they returned home.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×