श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 102: कालेयोंद्वारा तपस्वियों, मुनियों और ब्रह्मचारियों आदिका संहार तथा देवताओंद्वारा भगवान् विष्णुकी स्तुति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.102.15 
केचिदत्र महेष्वासा: शूरा: परमहर्षिता:।
मार्गमाणा: परं यत्नं दानवानां प्रचक्रिरे॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी पर कुछ महान धनुर्धर और पराक्रमी योद्धा भी थे, जो बड़े हर्ष और उत्साह से भरकर राक्षसों का स्थान ज्ञात करने और उनका दमन करने के लिए महान प्रयत्न करने लगे ॥15॥
 
There were also some great archers and valiant warriors on this earth, who, filled with great joy and enthusiasm, began to find out the location of the demons and make great efforts to suppress them. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)