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एवं संक्षीयमाणाश्च मानवा मनुजेश्वर।
आत्मत्राणपराभीता: प्राद्रवन्त दिशो भयात्॥ १३॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! इस प्रकार दिन-प्रतिदिन नष्ट होते हुए मनुष्य भयभीत होकर अपनी रक्षा के लिए चारों दिशाओं में भाग गए॥13॥
O Lord of men! The human beings who were getting destroyed day by day in this manner, became frightened and ran away in all four directions to save themselves. ॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥