श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 102: कालेयोंद्वारा तपस्वियों, मुनियों और ब्रह्मचारियों आदिका संहार तथा देवताओंद्वारा भगवान् विष्णुकी स्तुति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.102.1 
लोमश उवाच
समुद्रं ते समाश्रित्य वारुणं निधिमम्भस:।
कालेया: सम्प्रवर्तन्त त्रैलोक्यस्य विनाशने॥ १॥
 
 
अनुवाद
लोमशजी कहते हैं - हे राजन! वरुण के निवासस्थान समुद्र में आश्रय लेकर कालेय नामक दैत्य ने तीनों लोकों का विनाश करना आरम्भ कर दिया॥1॥
 
Lomasha says - O King! Taking shelter in the ocean, the abode of Varuna, the demon named Kaleya began to destroy the three worlds. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)