vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 101: वृत्रासुरका वध और असुरोंकी भयंकर मन्त्रणा
»
श्लोक 8
श्लोक
3.101.8
तान् दृष्ट्वा द्रवतो भीतान् सहस्राक्ष: पुरंदर:।
वृत्रे विवर्धमाने च कश्मलं महदाविशत्॥ ८॥
अनुवाद
देवताओं को भयभीत होकर भागते हुए देखकर और वृत्रासुर की गति का अनुमान करके सहस्र नेत्रों वाला इन्द्र महान् मोह से व्याकुल हो गया ॥8॥
Seeing the gods fleeing in fear, and estimating the progress of Vritraasura, the thousand-eyed Indra was overcome with great fascination. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×