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mahabharat 3.101.8: देवताओं को भयभीत होकर भागते हुए देखकर और वृत्रासुर की गति का अनुमान करके सहस्र नेत्रों वाला इन्द्र महान् मोह से व्याकुल हो गया ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.101: वृत्रासुरका वध और असुरोंकी भयंकर मन्त्रणा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 101: वृत्रासुरका वध और असुरोंकी भयंकर मन्त्रणा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.101.8 
तान् दृष्ट्वा द्रवतो भीतान् सहस्राक्ष: पुरंदर:।
वृत्रे विवर्धमाने च कश्मलं महदाविशत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
देवताओं को भयभीत होकर भागते हुए देखकर और वृत्रासुर की गति का अनुमान करके सहस्र नेत्रों वाला इन्द्र महान् मोह से व्याकुल हो गया ॥8॥
 
Seeing the gods fleeing in fear, and estimating the progress of Vritraasura, the thousand-eyed Indra was overcome with great fascination. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)