Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.101.2: कालकेय नामक एक विशाल राक्षस, जो अपने हाथों में शस्त्र धारण करने के कारण शिखरों वाले पर्वत के समान दिखाई देता था, उसकी सब ओर से रक्षा कर रहा था।   |   mahabharat अध्याय 3.101: वृत्रासुरका वध और असुरोंकी भयंकर मन्त्रणा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 101: वृत्रासुरका वध और असुरोंकी भयंकर मन्त्रणा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.101.2 
कालकेयैर्महाकायै: समन्तादभिरक्षितम्।
समुद्यतप्रहरणै: सशृङ्गैरिव पर्वतै:॥ २॥
 
 
अनुवाद
कालकेय नामक एक विशाल राक्षस, जो अपने हाथों में शस्त्र धारण करने के कारण शिखरों वाले पर्वत के समान दिखाई देता था, उसकी सब ओर से रक्षा कर रहा था।
 
A huge demon named Kalkakeya, who looked like a mountain with peaks because of the weapons in his hands, was protecting him from all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)