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mahabharat 3.101.17: उस समय समस्त देवतागण अत्यन्त प्रसन्न हुए। महर्षिगण भी बड़े हर्ष से भगवान इन्द्र की स्तुति करने लगे। तत्पश्चात् समस्त देवताओं ने मिलकर वृत्रासुर के वध से कुपित हुए समस्त दैत्यों का तत्काल संहार कर दिया॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.101: वृत्रासुरका वध और असुरोंकी भयंकर मन्त्रणा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 101: वृत्रासुरका वध और असुरोंकी भयंकर मन्त्रणा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.101.17 
सर्वे च देवा मुदिता: प्रहृष्टा
महर्षयश्चेन्द्रमभिष्टुवन्त:।
सर्वांश्च दैत्यांस्त्वरिता: समेत्य
जघ्नु: सुरा वृत्रवधाभितप्तान्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उस समय समस्त देवतागण अत्यन्त प्रसन्न हुए। महर्षिगण भी बड़े हर्ष से भगवान इन्द्र की स्तुति करने लगे। तत्पश्चात् समस्त देवताओं ने मिलकर वृत्रासुर के वध से कुपित हुए समस्त दैत्यों का तत्काल संहार कर दिया॥17॥
 
At that time all the gods were very happy. Maharshigan also started praising Lord Indra with great joy. After that, all the gods together immediately killed all the demons who were enraged by the killing of Vritrasura. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)