Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.101.15: इन्द्र के वज्र से आहत होकर सोने की माला धारण करने वाला वह महादैत्य पृथ्वी पर गिर पड़ा, मानो प्राचीन काल में भगवान विष्णु के हाथ से छूटा हुआ महान पर्वत मंदिर हो॥15॥ | mahabharat अध्याय 3.101: वृत्रासुरका वध और असुरोंकी भयंकर मन्त्रणा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स शक्रवज्राभिहत: पपात
महासुर: काञ्चनमाल्यधारी।
यथा महाशैलवर: पुरस्तात्
स मन्दरो विष्णुकराद् विमुक्त:॥ १५॥
अनुवाद
इन्द्र के वज्र से आहत होकर सोने की माला धारण करने वाला वह महादैत्य पृथ्वी पर गिर पड़ा, मानो प्राचीन काल में भगवान विष्णु के हाथ से छूटा हुआ महान पर्वत मंदिर हो॥15॥
Being hurt by Indra's thunderbolt, that great demon wearing the gold garland fell on the earth like the great mountain temple that had been released from the hands of Lord Vishnu in ancient times. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥