Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.101.14: राजन! उस समय उस अत्यन्त भयानक गर्जना को सुनकर देवराज इन्द्र अत्यन्त व्याकुल और भयभीत हो गये। उन्होंने शीघ्रतापूर्वक वृत्रासुर को मारने के लिए अपने महान वज्र का प्रहार किया।   |   mahabharat अध्याय 3.101: वृत्रासुरका वध और असुरोंकी भयंकर मन्त्रणा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 101: वृत्रासुरका वध और असुरोंकी भयंकर मन्त्रणा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.101.14 
ततो महेन्द्र: परमाभितप्त:
श्रुत्वा रवं घोररूपं महान्तम्।
भये निमग्नस्त्वरितो मुमोच
वज्रं महत् तस्य वधाय राजन्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस समय उस अत्यन्त भयानक गर्जना को सुनकर देवराज इन्द्र अत्यन्त व्याकुल और भयभीत हो गये। उन्होंने शीघ्रतापूर्वक वृत्रासुर को मारने के लिए अपने महान वज्र का प्रहार किया।
 
King! At that time, hearing that extremely terrifying roar, Devaraj Indra became very agitated and frightened. In great haste he struck his great thunderbolt to kill Vritraasura.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)