श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 101: वृत्रासुरका वध और असुरोंकी भयंकर मन्त्रणा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.101.11 
विष्णुना गोपितं शक्रं दृष्ट्वा देवगणास्तत:।
सर्वे तेज: समादध्युस्तथा ब्रह्मर्षयोऽमला:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब देवताओं ने देखा कि भगवान विष्णु ने इन्द्र की रक्षा की है, तब उन्होंने शुद्ध हृदय वाले ब्रह्मऋषियों के साथ मिलकर इन्द्र को अपने-अपने तेज से परिपूर्ण कर दिया॥11॥
 
When the gods saw that Indra was protected by Lord Vishnu, they, along with the Brahmarishis with pure hearts, filled Indra with their respective radiance. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)