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mahabharat 3.100.5: तब सभी देवता वृत्रासुर को मारने का प्रयास करने लगे। वह देवराज इन्द्र को लेकर ब्रह्माजी के पास गये। 5॥   |   mahabharat अध्याय 3.100: वृत्रासुरसे त्रस्त देवताओंको महर्षि दधीचका अस्थिदान एवं वज्रका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 100: वृत्रासुरसे त्रस्त देवताओंको महर्षि दधीचका अस्थिदान एवं वज्रका निर्माण  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.100.5 
ततो वृत्रवधे यत्नमकुर्वंस्त्रिदशा: पुरा।
पुरंदरं पुरस्कृत्य ब्रह्माणमुपतस्थिरे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तब सभी देवता वृत्रासुर को मारने का प्रयास करने लगे। वह देवराज इन्द्र को लेकर ब्रह्माजी के पास गये। 5॥
 
Then all the gods started trying to kill Vritrasura. He led Devraj Indra and went to Brahmaji. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)