vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 100: वृत्रासुरसे त्रस्त देवताओंको महर्षि दधीचका अस्थिदान एवं वज्रका निर्माण
»
श्लोक 19
श्लोक
3.100.19
तत्रापश्यन् दधीचं ते दिवाकरसमद्युतिम्।
जाज्वल्यमानं वपुषा यथा लक्ष्म्या पितामहम्॥ १९॥
अनुवाद
उन्होंने देखा कि महर्षि दधीच भगवान सूर्य के समान तेजस्वी हैं और उनके शरीर की दिव्य कांति के कारण वे ब्रह्माजी के समान प्रतीत हो रहे हैं॥19॥
He saw that Maharishi Dadhich was shining as brightly as the Lord Sun. Due to the divine glow of his body, he looks like Lord Brahma. 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×