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mahabharat 3.100.19: उन्होंने देखा कि महर्षि दधीच भगवान सूर्य के समान तेजस्वी हैं और उनके शरीर की दिव्य कांति के कारण वे ब्रह्माजी के समान प्रतीत हो रहे हैं॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.100: वृत्रासुरसे त्रस्त देवताओंको महर्षि दधीचका अस्थिदान एवं वज्रका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 100: वृत्रासुरसे त्रस्त देवताओंको महर्षि दधीचका अस्थिदान एवं वज्रका निर्माण  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.100.19 
तत्रापश्यन् दधीचं ते दिवाकरसमद्युतिम्।
जाज्वल्यमानं वपुषा यथा लक्ष्म्या पितामहम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने देखा कि महर्षि दधीच भगवान सूर्य के समान तेजस्वी हैं और उनके शरीर की दिव्य कांति के कारण वे ब्रह्माजी के समान प्रतीत हो रहे हैं॥19॥
 
He saw that Maharishi Dadhich was shining as brightly as the Lord Sun. Due to the divine glow of his body, he looks like Lord Brahma. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)