श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 100: वृत्रासुरसे त्रस्त देवताओंको महर्षि दधीचका अस्थिदान एवं वज्रका निर्माण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.100.11 
महच्छत्रुहणं घोरं षडश्रं भीमनि:स्वनम्।
तेन वज्रेण वै वृत्रं वधिष्यति शतक्रतु:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'उसका आकार षट्भुज के समान होगा। वह महान एवं भयंकर शत्रु-संहारक अस्त्र भयंकर वज्र उत्पन्न करेगा। इन्द्र उस वज्र से वृत्रासुर का अवश्य ही वध करेंगे। 11॥
 
‘Its shape will be like a hexagon. That great and fierce enemy-killing weapon will create terrible thunder. Indra will definitely kill Vritrasura with that thunderbolt. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)