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mahabharat 3.100.10: ‘तुम्हारे अनुरोध करने पर वे अपना शरीर त्यागकर तुम्हें अपनी हड्डियाँ दे देंगे। तुम उन हड्डियों से एक प्रबल एवं अत्यंत भयंकर वज्र बनाओ।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.100: वृत्रासुरसे त्रस्त देवताओंको महर्षि दधीचका अस्थिदान एवं वज्रका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 100: वृत्रासुरसे त्रस्त देवताओंको महर्षि दधीचका अस्थिदान एवं वज्रका निर्माण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.100.10 
स शरीरं समुत्सृज्य स्वान्यस्थीनि प्रदास्यति।
तस्यास्थिभिर्महाघोरं वज्रं संस्क्रियतां दृढम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारे अनुरोध करने पर वे अपना शरीर त्यागकर तुम्हें अपनी हड्डियाँ दे देंगे। तुम उन हड्डियों से एक प्रबल एवं अत्यंत भयंकर वज्र बनाओ।॥10॥
 
‘On your request they will give up their bodies and give you their bones. Using those bones you should make a strong and extremely fearsome Vajra.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)