श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 10: व्यासजीका जाना, मैत्रेयजीका धृतराष्ट्र और दुर्योधनसे पाण्डवोंके प्रति सद्भावका अनुरोध तथा दुर्योधनके अशिष्ट व्यवहारसे रुष्ट होकर उसे शाप देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.10.9 
सुखेनागमनं कच्चिद् भगवन् कुरुजाङ्गलान्।
कच्चित् कुशलिनो वीरा भ्रातर: पञ्च पाण्डवा:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'प्रभो! इस कुरुदेश में आपका आगमन सुखदायी हुआ न? वीर भाई! क्या पाँचों पाण्डव कुशलपूर्वक हैं?'
 
'Lord! Your arrival in this Kurudesh was a happy one, wasn't it? Brave brother, are all five Pandavas doing well? 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)