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mahabharat 3.10.5: महाराज! ये महामुनि इस कुल की शांति के लिए आपके पुत्र दुर्योधन को उचित शिक्षा देंगे॥5॥   |   mahabharat अध्याय 3.10: व्यासजीका जाना, मैत्रेयजीका धृतराष्ट्र और दुर्योधनसे पाण्डवोंके प्रति सद्भावका अनुरोध तथा दुर्योधनके अशिष्ट व्यवहारसे रुष्ट होकर उसे शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 10: व्यासजीका जाना, मैत्रेयजीका धृतराष्ट्र और दुर्योधनसे पाण्डवोंके प्रति सद्भावका अनुरोध तथा दुर्योधनके अशिष्ट व्यवहारसे रुष्ट होकर उसे शाप देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.10.5 
एष दुर्योधनं पुत्रं तव राजन् महानृषि:।
अनुशास्ता यथान्यायं शमायास्य कुलस्य च॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! ये महामुनि इस कुल की शांति के लिए आपके पुत्र दुर्योधन को उचित शिक्षा देंगे॥5॥
 
Maharaj! This great sage will give proper education to your son Duryodhana for the peace of this clan. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)