Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.10.4: व्यास बोले, "हे राजन! ये महान ऋषि भगवान मैत्रेय आ रहे हैं। पाँचों पाण्डव भाइयों से मिलने के बाद, वे अब हमसे मिलने यहाँ आ रहे हैं।"   |   mahabharat अध्याय 3.10: व्यासजीका जाना, मैत्रेयजीका धृतराष्ट्र और दुर्योधनसे पाण्डवोंके प्रति सद्भावका अनुरोध तथा दुर्योधनके अशिष्ट व्यवहारसे रुष्ट होकर उसे शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 10: व्यासजीका जाना, मैत्रेयजीका धृतराष्ट्र और दुर्योधनसे पाण्डवोंके प्रति सद्भावका अनुरोध तथा दुर्योधनके अशिष्ट व्यवहारसे रुष्ट होकर उसे शाप देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.10.4 
व्यास उवाच
अयमायाति वै राजन् मैत्रेयो भगवानृषि:।
अन्विष्य पाण्डवान् भ्रातॄनिहैत्यस्मद्दिदृक्षया॥ ४॥
 
 
अनुवाद
व्यास बोले, "हे राजन! ये महान ऋषि भगवान मैत्रेय आ रहे हैं। पाँचों पाण्डव भाइयों से मिलने के बाद, वे अब हमसे मिलने यहाँ आ रहे हैं।"
 
Vyasa said, "O King! This great sage Lord Maitreya is coming. After meeting the five Pandava brothers, he is now coming here to meet us."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)